बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में एक अक्टूबर से शुरू होने वाले पर्यटन सीजन से पहले करीब 200 गाइडों की तैयारी कराई जा रही है। ‘जंगल की पाठशाला’ नाम के इस प्रशिक्षण में उन्हें अंग्रेजी बोलने से लेकर वन्यजीवों और स्थानीय विरासत की जानकारी पर्यटकों तक रोचक ढंग से पहुंचाना सिखाया जा रहा है।

मैदानी अभ्यास से सीख रहे जंगल के संकेत

प्रशिक्षण के दौरान गाइडों को फील्ड विजिट कराई जा रही है। वे वन्यजीवों के पैरों के निशान और गतिविधियों के साथ जंगल में मिलने वाली अलग-अलग पक्षी प्रजातियों की पहचान करना सीख रहे हैं।

बाघ के अलावा अन्य वन्यजीवों और पक्षियों पर भी विशेष ध्यान है। ईगल समेत विभिन्न पक्षियों के व्यवहार की जानकारी दी जा रही है, ताकि सफारी का अनुभव केवल बाघ देखने तक सीमित न रहे।

साल के जंगल से शेषशैय्या तक पाठ्यक्रम

विशेषज्ञ गाइडों को साल के घने जंगलों, पेड़ों की उम्र, पर्यावरण में उनकी भूमिका और संरक्षण की जरूरत समझा रहे हैं। इसका उद्देश्य सफारी के दौरान जंगल की प्राकृतिक संरचना और महत्व को सरल तरीके से बताने की क्षमता विकसित करना है।

ताला क्षेत्र की शेषशैय्या प्रतिमा और उसके पैरों से निकलने वाली चरणगंगा जलधारा को भी प्रशिक्षण में शामिल किया गया है। गाइडों को मगधी और खितौली क्षेत्रों के प्राकृतिक तथा ऐतिहासिक महत्व से भी परिचित कराया जा रहा है।

विदेशी पर्यटकों के लिए भाषा पर ध्यान

क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय के अनुसार, गाइडों को अंग्रेजी भाषा का प्रशिक्षण भी मिल रहा है। इसका लक्ष्य ऐसे शब्दों और जानकारियों को सरलता से समझाना है जिन्हें पर्यटकों के लिए हिंदी में समझना कठिन हो सकता है।

प्रबंधन प्रशिक्षण के दौरान गाइडों की समस्याओं और जरूरतों की जानकारी भी जुटा रहा है। तैयारी पूरी होने के बाद प्रशिक्षित गाइड नए पर्यटन सीजन में जंगल, जैव विविधता और बांधवगढ़ की विरासत के बारे में पर्यटकों को विस्तृत जानकारी देंगे।