शहर बढ़ते हैं तो सबसे पहले छोटी नदियां और नाले दब जाते हैं। इसी चिंता पर गुरुवार को स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए), भोपाल में ‘शहर नदी संवाद 2026’ हुआ। नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि शहरों का विकास और नदियों का संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं।

मुख्य धारा से आगे देखें

आयुक्त ने कहा कि नदी संरक्षण केवल मुख्य प्रवाह तक सीमित नहीं रहना चाहिए। हेडवॉटर स्ट्रीम्स, यानी उद्गम के पास की छोटी धाराएं, और सूक्ष्म सहायक धाराएं ही लगातार जल प्रवाह, भूजल पुनर्भरण और जैव विविधता को सहारा देती हैं। आधुनिक शहरी नियोजन में नदी, सहायक धाराएं, जलग्रहण क्षेत्र और प्राकृतिक पारिस्थितिकी को प्राथमिकता से शामिल करना जरूरी है।

कालियासोत का उदाहरण

श्री भोंडवे ने भोपाल की कालियासोत नदी सहित दूसरी जल प्रणालियों के पुनरुद्धार के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और शहरी नियोजन से जुड़े विभागों के बीच समन्वय पर जोर दिया।

संवाद में प्राकृतिक, भौतिक और सामाजिक विज्ञान के विशेषज्ञों के साथ शोधकर्ता, डेवलपमेंट प्रोफेशनल्स, कलाकार और कवि शामिल हुए। दक्षिणी विंध्य से निकलने वाली मध्य भारतीय जलग्रहण धाराओं, नदी तटीय क्षेत्रों के संरक्षण और अनियंत्रित शहरीकरण के पर्यावरणीय असर पर चर्चा हुई।