नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे 9वें ‘भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह’ में मध्यप्रदेश ने अपनी जल नीति रखी। ‘जल को राष्ट्रीय परिसंपत्ति के रूप में पुनर्परिभाषित करना’ विषय पर उच्चस्तरीय परिचर्चा में प्रदेश का प्रतिनिधित्व अपर मुख्य सचिव, नगरीय विकास एवं आवास संजय दुबे ने किया।

श्री दुबे ने कहा कि जल केवल साधारण प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संपत्ति है, जो राज्य की आर्थिक वृद्धि, शहरों की सहनशीलता, पर्यावरण संतुलन और दीर्घकालिक योजना की धुरी है।

इंदौर का ग्रीन बॉन्ड

उन्होंने खास तौर पर इंदौर का उदाहरण दिया, जहां नर्मदा नदी प्रणाली से जुड़ी जल अधोसंरचना के लिए देश का सफल ‘ग्रीन बॉन्ड’ जारी किया गया। उनके अनुसार यह नवाचार बताता है कि नगरीय विकास और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य एक साथ आगे बढ़ाए जा सकते हैं।

नमामि नर्मदे और भविष्य की जल सुरक्षा

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि ‘नमामि नर्मदे’ मिशन नदियों के पुनरुद्धार, पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण और दीर्घकालिक जल सुरक्षा के प्रति प्रदेश की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भावी जल सुरक्षा और सक्षम शहरों के लिए नवोन्मेषी वित्तीय तंत्र, टिकाऊ अधोसंरचना और एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन अपनाना समय की मांग है।